HDFC बैंक परिवर्तन: 47,000 से अधिक छात्रों तक पहुँचा STEM शिक्षा कार्यक्रम

HDFC बैंक परिवर्तन के तहत सात राज्यों में 47,000 से अधिक छात्रों तक अनुभवात्मक और समावेशी STEM शिक्षा पहुँची।

मुंबई, 28 फरवरी 2026: राष्ट्रीय विज्ञान दिवस के अवसर पर HDFC बैंक ने अपने CSR कार्यक्रम HDFC बैंक परिवर्तन के तहत STEM (विज्ञान, प्रौद्योगिकी, इंजीनियरिंग और गणित) शिक्षा पहल के विस्तार की घोषणा की। इस विस्तारित पहल का उद्देश्य कई राज्यों में अनुभवात्मक और समावेशी विज्ञान शिक्षा को मजबूत करना है, जिससे पिछड़े समुदायों के 47,000 से अधिक छात्रों तक पहुँच बन रही है।


HDFC बैंक परिवर्तन STEM पहल क्या है?

परिवर्तन बैंक का प्रमुख CSR कार्यक्रम है। इसके तहत STEM शिक्षा के लिए मोबाइल विज्ञान ढाँचा, दिव्यांग छात्रों के लिए सुलभ शिक्षण साधन और खगोल विज्ञान तथा अंतरिक्ष प्रयोगशालाओं को जोड़ा गया है, ताकि कक्षा की पढ़ाई और प्रायोगिक प्रयोगों के बीच का अंतर कम हो सके।

HDFC बैंक CSR प्रमुख नुसरत पठान के अनुसार, “छोटी उम्र में ही वैज्ञानिक जिज्ञासा विकसित करना भविष्य के लिए तैयार विद्यार्थी बनाने के लिए जरूरी है। परिवर्तन के जरिए हम अनुभवात्मक STEM शिक्षा तक पहुँच बढ़ा रहे हैं, खासकर पिछड़े इलाकों में। हमारा जोर समावेशन, प्रायोगिक अनुभव और ऐसे साझेदारियों पर है जो स्कूलों और समुदायों में टिकाऊ असर दे सकें।”


कार्यक्रम का दायरा और राज्य

इन पहलों का दायरा महाराष्ट्र, उत्तर प्रदेश, पश्चिम बंगाल, कर्नाटक, तमिलनाडु, झारखंड और पूर्वोत्तर तक फैला है। यह विस्तार विकसित भारत 2047 की राष्ट्रीय दृष्टि और वैज्ञानिक दृष्टिकोण तथा नवाचार को आगे बढ़ाने के अनुरूप है।

- Advertisement -

महाराष्ट्र में विज्ञान ढाँचा

अगस्त्य इंटरनेशनल फाउंडेशन के साथ साझेदारी में बैंक ने महाराष्ट्र के 11 जिलों—नागपुर, नासिक, पुणे और छत्रपति संभाजीनगर सहित—में STEM कार्यक्रम शुरू किया है। इसमें आठ विज्ञान केंद्र, तीन एकीकृत मोबाइल विज्ञान प्रयोगशालाएँ और कक्षा 7 से 9 के छात्रों के लिए 3D प्रिंटर तथा माइक्रोकंट्रोलर से लैस एक मोबाइल इनोवेशन लैब शामिल हैं। 12,000 सरकारी स्कूल के छात्रों को कोडिंग और अल्गोरिदमिक सोच पर 16 मॉड्यूल वाला पाठ्यक्रम दिया जा रहा है। मोबाइल लैब मॉडल उन स्कूलों तक पहुँच बढ़ाने के लिए है जहाँ प्रयोगशाला ढाँचा सीमित है। यूवा अनस्टॉपेबल के साथ साझेदारी में अगले दो वर्षों में महाराष्ट्र भर के 120 सरकारी और सहायता प्राप्त स्कूलों में STEM लैब स्थापित की जाएंगी, जिनमें स्मार्ट क्लासरूम तकनीक और प्रायोगिक STEM उपकरण होंगे।

दिव्यांग छात्रों के लिए समावेशी STEM

दिव्यांगजनों के लिए समर्थनम ट्रस्ट के साथ साझेदारी में “लर्निंग विदाउट लिमिट्स” पहल पाँच राज्यों के बधिर स्कूलों में 35 सुलभ STEM लैब स्थापित कर रही है। कार्यक्रम में साइन लैंग्वेज में अनुकूलित STEM सामग्री और 200 से अधिक शिक्षकों को सहायक तकनीक में प्रशिक्षण शामिल है, जिससे 2,900 से अधिक वाणी और श्रवण बाधित छात्रों को सीधा लाभ मिल रहा है।

उत्तर प्रदेश में खगोल और अंतरिक्ष विज्ञान

अंबुजा फाउंडेशन के साथ साझेदारी में HDFC बैंक ने लखनऊ के आर्मी पब्लिक स्कूल में ISRO-संरेखित मॉडल वाली एक खगोल विज्ञान लैब और राज भवन, लखनऊ में एक स्पेस लैब स्थापित की है, जहाँ स्टाफ के बच्चों और सरकारी तथा निजी स्कूलों के आने वाले छात्र पहुँच सकते हैं।

पुणे में जिज्ञासा मैक्स – टच प्लस टेक

WOSCA और लाइफ-लैब के साथ “जिज्ञासा मैक्स – टच प्लस टेक” कार्यक्रम 48 स्कूलों में एकीकृत STEM मॉडल लेकर आया है, जिससे 10,462 छात्र जुड़े हैं। इसमें गेमिफाइड डिजिटल लर्निंग प्लेटफॉर्म और समुदाय आधारित विज्ञान गतिविधियाँ शामिल हैं ताकि सीखने का विस्तार स्कूल के बाद भी हो सके।


पात्रता (Eligibility)

इस कार्यक्रम का लाभ किन्हें मिलता है, यह पहल और राज्य के हिसाब से तय होता है।

- Advertisement -
  • सरकारी और सहायता प्राप्त स्कूल: महाराष्ट्र तथा अन्य राज्यों में चयनित सरकारी और सहायता प्राप्त विद्यालयों के छात्र।
  • पिछड़े इलाके: ऐसे समुदाय जहाँ विज्ञान प्रयोगशालाओं और डिजिटल संसाधनों की कमी है।
  • दिव्यांग छात्र: वाणी और श्रवण बाधित बच्चों वाले देश भर के चयनित बधिर स्कूल।
  • स्टाफ और आगंतुक छात्र: राज भवन लखनऊ स्पेस लैब स्टाफ के बच्चों और सरकारी/निजी स्कूलों के आने वाले छात्रों के लिए खुला है।

स्कूलों का चयन बैंक और उसके कार्यान्वयन साझेदारों (अगस्त्य, यूवा अनस्टॉपेबल, समर्थनम, अंबुजा फाउंडेशन आदि) द्वारा जिला और जरूरत के आधार पर किया जाता है।


आयु सीमा और कक्षा (Age Limit & Class)

कार्यक्रम मुख्यतः स्कूली बच्चों को ध्यान में रखकर बनाया गया है। आयु या कक्षा का विवरण पहल के अनुसार है:

  • मोबाइल इनोवेशन लैब और कोडिंग पाठ्यक्रम: कक्षा 7 से 9 के छात्र।
  • विज्ञान केंद्र और मोबाइल विज्ञान लैब: स्कूल स्तर के छात्र (प्राथमिक से माध्यमिक)।
  • लर्निंग विदाउट लिमिट्स: बधिर स्कूलों में पढ़ने वाले वाणी और श्रवण बाधित छात्र, कोई विशिष्ट आयु सीमा नहीं।
  • खगोल और स्पेस लैब: स्कूली बच्चे (स्टाफ और आगंतुक विद्यार्थी)।
  • जिज्ञासा मैक्स: 48 स्कूलों में पढ़ने वाले छात्र; पाठ्यक्रम स्कूल स्तर के अनुरूप।

कुल मिलाकर लगभग 47,000 से अधिक छात्र इन पहलों से जुड़े हैं; कुछ स्रोत 35,000 से अधिक का भी उल्लेख करते हैं।

- Advertisement -

चयन प्रक्रिया (Selection Process)

यह कोई व्यक्तिगत आवेदन वाली योजना नहीं है। छात्रों तक पहुँच स्कूल और साझेदार संस्थाओं के माध्यम से बनती है।

स्कूल / संस्थान का चयन कैसे होता है?

  • जिला और भूगोल: पहले राज्य और जिले चुने जाते हैं जहाँ विज्ञान ढाँचा कमजोर है या पिछड़े समुदाय हैं।
  • साझेदार एनजीओ: अगस्त्य, यूवा अनस्टॉपेबल, समर्थनम, अंबुजा फाउंडेशन, WOSCA, लाइफ-लैब जैसी संस्थाएँ राज्य/जिले में स्कूलों की पहचान करती हैं।
  • स्कूल की तैयारी: जिन स्कूलों में लैब या स्मार्ट क्लास लगानी होती है, उनकी जगह और प्रशासनिक सहमति देखी जाती है।
  • रोल आउट: चयन के बाद लैब स्थापना, शिक्षक प्रशिक्षण और पाठ्यक्रम डिलिवरी शुरू होती है।

छात्रों के लिए चयन

छात्रों का अलग से चयन नहीं होता। जो स्कूल कार्यक्रम में शामिल हो जाते हैं, उनके नामांकित छात्र (संबंधित कक्षाओं के) स्वतः लाभान्वित होते हैं। दिव्यांग पहल में चयनित बधिर स्कूलों के सभी पात्र छात्र शामिल होते हैं।


कैसे आवेदन करें (How to Apply) – चरणबद्ध प्रक्रिया

चूँकि यह स्कूल/संस्थान स्तर की पहल है, व्यक्तिगत छात्र सीधे आवेदन नहीं करते। स्कूल या संस्था को कार्यक्रम में शामिल होने के लिए निम्नलिखित दिशा-निर्देश ध्यान में रखने चाहिए:

  1. पहचान करें कि आपका स्कूल पात्र है या नहीं: सरकारी या सहायता प्राप्त स्कूल होना चाहिए; पिछड़े या कम संसाधन वाले इलाके को प्राथमिकता मिलती है।
  2. संबंधित साझेदार संस्था से संपर्क करें: महाराष्ट्र के लिए अगस्त्य इंटरनेशनल फाउंडेशन या यूवा अनस्टॉपेबल; दिव्यांग स्कूलों के लिए समर्थनम ट्रस्ट; उत्तर प्रदेश के लिए अंबुजा फाउंडेशन; पुणे के लिए WOSCA/लाइफ-लैब। इन संस्थाओं की आधिकारिक वेबसाइट या ईमेल से संपर्क किया जा सकता है।
  3. स्कूल की जानकारी और जरूरत दर्ज कराएँ: स्कूल का नाम, जिला, छात्र संख्या, मौजूदा विज्ञान/कंप्यूटर सुविधाएँ और क्यों आपको इस कार्यक्रम की जरूरत है—यह विवरण भेजें।
  4. प्रशासनिक सहमति: जिला शिक्षा अधिकारी या संबंधित विभाग से अनुमति/सिफारिश लेनी पड़ सकती है, क्योंकि कई पहल सरकारी स्कूलों के साथ समन्वय में चलती हैं।
  5. साझेदार की मूल्यांकन प्रक्रिया: साझेदार संस्था जरूरत, संसाधन और विस्तार योजना के आधार पर स्कूलों की सूची बनाती है; चयन होने पर आपको सूचित किया जाएगा और लैब/प्रशिक्षण शुरू होगा।

व्यक्तिगत छात्र या अभिभावक अपने स्कूल प्रशासन से पूछ सकते हैं कि क्या उनका स्कूल पहले से किसी साझेदार के साथ जुड़ा है या आगे आवेदन कर सकता है।


कार्यान्वयन और साझेदारी का ढाँचा

चयन के बाद कार्यान्वयन चरणबद्ध होता है: पहले ढाँचा (लैब, उपकरण) लगाया जाता है, फिर शिक्षकों को प्रशिक्षण दिया जाता है, उसके बाद पाठ्यक्रम और गतिविधियाँ शुरू होती हैं। मोबाइल लैब वाले मॉडल में लैब विभिन्न स्कूलों में घूमकर पहुँचती है। निरंतर मॉनिटरिंग और साझेदार संस्थाओं की रिपोर्टिंग से प्रभाव का आकलन किया जाता है।


SDG 4 और गुणवत्तापूर्ण शिक्षा से जुड़ाव

HDFC बैंक परिवर्तन अपनी शिक्षा पहल को संयुक्त राष्ट्र के सतत विकास लक्ष्य 4 (गुणवत्तापूर्ण शिक्षा) के साथ जोड़ता है। कोडिंग मॉड्यूल और 3D प्रिंटिंग जैसे डिजिटल उपकरणों को मूल विज्ञान शिक्षा के साथ जोड़कर कार्यक्रम वैज्ञानिक साक्षरता मजबूत करता है और पहुँच तथा समावेशन को केंद्र में रखता है।


विवरणलिंक / जानकारी
HDFC बैंक आधिकारिक वेबसाइटhdfcbank.com
HDFC बैंक परिवर्तन (CSR)CSR पेज
अगस्त्य इंटरनेशनल फाउंडेशनagastya.org
समर्थनम ट्रस्ट फॉर द डिसेबल्डsamarthanam.org
यूवा अनस्टॉपेबलyuvaunstoppable.org
स्रोत (राज्यसभा / समाचार)सरकारी जवाब राज्यसभा 4 दिसंबर 2025; India CSR, 28 फरवरी 2026
Share This Article
SarkariDost.com के संस्थापक व मुख्य योगदानकर्ता मोहम्मद सलीम पिछले 15 वर्षों से अधिक समय से सरकारी जानकारियों के क्षेत्र में सक्रिय हैं और उन्हें रिसर्च, वेबसाइट निर्माण व ब्लॉगिंग का व्यापक अनुभव है। उनका उद्देश्य सरकारी योजनाओं, भर्तियों और प्रक्रियाओं को सरल, स्पष्ट और आम लोगों के लिए समझने योग्य भाषा में प्रस्तुत करना है, ताकि SarkariDost.com के माध्यम से पाठकों तक केवल भरोसेमंद, तथ्यपरक और उपयोगी सरकारी जानकारी बिना किसी भ्रम के पहुँच सके।